Uttarakhand: अफसर भी डरते थे भुवन चंद्र खंडूरी से
भुवन चंद्र खंडूरी का स्वभाव ऐसा था कि लोग उनसे थोड़ा डरते भी थे और उतना ही सम्मान भी करते थे। कहा जाता है कि अफसर अगर बिना तैयारी के मीटिंग में पहुंच जाएं, तो खंडूरी जी एक-दो सवाल में ही पूरी फाइल की पोल खोल देते थे। इसलिए सचिवालय में मजाक चलता था-खंडूरी साहब के कमरे में जाना है, तो होमवर्क करके जाना।उनकी यही सख्त लेकिन साफ कार्यशैली उन्हें बाकी नेताओं से अलग बनाती थी।
Uttarakhand: सादगी के किस्से भी खूब मशहूर रहे
उनकी सादगी के किस्से भी खूब मशहूर रहे। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी तामझाम और दिखावे से दूरी बनाए रखी। लोग कहते थे कि खंडूरी जी सत्ता को रुतबा नहीं, जिम्मेदारी मानते थे। कम बोलना उनकी आदत थी, लेकिन जब बोलते थे तो एक लाइन में पूरी बात खत्म कर देते थे। यही वजह रही कि राजनीति में उनका नाम सिर्फ पद से नहीं, बल्कि अनुशासन और ईमानदारी की पहचान से जुड़ गया।

Uttarakhand:उत्तराखंड की राजनीति में खंडूरी है जरूरी खूब चला नारा
उत्तराखंड की राजनीति में “खंडूरी है जरूरी” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक दौर की पहचान बन गया था। चाय की दुकानों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक यह जुमला चलता था। लोग मजाक में कहते थे-सरकार कोई भी हो, खंडूरी स्टाइल अलग ही रहेगा।” यही उनके व्यक्तित्व की ताकत थी.सख्त छवि, साफ नीयत और अपने अंदाज से सबके बीच अलग पहचान।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का निधन



