Uttarakhand:सपने में आईं पाषाण देवी और बदल गया राजनीतिक सफर
राजनीति के गलियारों में यह किस्सा बेहद मशहूर है कि सेना से रिटायर होने के बाद भुवन चंद्र खंडूरी कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का मन बना चुके थे। इसी बीच एक रात नैनीताल की प्रसिद्ध मां पाषाण देवी हाथ में फूल लेकर उनके सपने में आईं। इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद वे रातों-रात मां पाषाण देवी के दर्शन करने नैनीताल पहुंचे। माना जाता है कि इसी मंदिर से उन्हें जीवन की नई दिशा और प्रेरणा (इनलाइटमेंट) मिली, जिसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और आगे चलकर राज्य के मुख्यमंत्री बने
Uttarakhand: पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी का नैनीताल से था खासा लगाव
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से समूचे प्रदेश के साथ-साथ उनके ससुराल नैनीताल में भी गहरा शोक है। कड़क मिजाज और ईमानदार राजनीति के लिए मशहूर जनरल खंडूरी का नैनीताल से सिर्फ पारिवारिक ही नहीं, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक और प्रशासनिक रिश्ता भी था। आज उनके जाने के बाद नैनीताल की जनता उनसे जुड़े कई दिलचस्प और अनसुने किस्से याद कर भावुक है।

Uttarakhand;नैनीताल में था ससुराल
नैनीताल भुवन चंद्र खंडूरी की ससुराल थी और वे इस रिश्ते का पूरा मान रखते थे। चुनावी रैलियों में जब भी वे नैनीताल में मंच पर आते, तो कभी भी पारंपरिक रूप से ‘भाइयों और बहनों’ कहकर भाषण शुरू नहीं करते थे। ससुराल पक्ष का आदर करते हुए वे हमेशा जनता को ‘देवियों और सज्जनों’ कहकर संबोधित करते थे।
Uttarakhand: नैनीताल के लिए किये किए काम
एक कड़क प्रशासक के रूप में नैनीताल को संवारने में उनका बड़ा योगदान रहा। नैनीताल झील की सफाई और शहर में इमारतों की ऊंचाई (बिल्डिंग हाइट) को नियंत्रित करने के सख्त नियम उन्हीं की देन हैं। अनुशासन के पक्के खंडूरी के दौर में नैनीताल के अफसर अक्सर लेट-लतीफी के लिए डरते थे, क्योंकि मुख्यमंत्री खुद तय समय से पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच जाते थे। आज उनका जाना नैनीताल के लिए एक युग का अंत है, लेकिन उनकी यादें और विकास कार्य हमेशा जिंदा रहेंगे।


