Uttarakhand:जिहादी ड्रग फैक्ट्री का पर्दाफाश
देहरादून में जिहादी ड्रग यानी ‘कैप्टागन’ बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार दिल्ली में NCB द्वारा पकड़ी गई 227 किलो ड्रग्स की खेप से जुड़े हैं। राजधानी देहरादून के सहसपुर इलाके में चल रही ‘ग्रीन हर्बल हाईटेक फैक्ट्री’ में चोरी-छिपे यह खतरनाक जिहादी ड्रग तैयार की जा रही थी। दिल्ली में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की बड़ी छापेमारी के बाद जब कड़ियां जोड़ी गईं, तो उत्तराखंड से ये हैरान करने वाला कनेक्शन सामने आया। जब NCB की टीम इस फैक्ट्री के भीतर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। फैक्ट्री के अंदर दवा बनाने के नाम पर ड्रग्स तैयार करने का पूरा हाईटेक सेटअप लगा हुआ था।
Uttarakhand:फैक्ट्री के अंदर टैबलेट बनाने की बड़ी मशीनें
जांच में पता चला है कि फैक्ट्री के अंदर टैबलेट बनाने की बड़ी मशीनें, कैप्सूल भरने और सील करने वाले हाईटेक उपकरण और ब्लिस्टर पैकेजिंग मशीनें मौजूद थीं। इसके साथ ही भारी मात्रा में संदिग्ध केमिकल, कच्चा माल और पैकेजिंग का सामान भी बरामद किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध धंधे के लिए फैक्ट्री को हर दिन 50 हजार रुपये के भारी-भरकम किराए पर दिया गया था। वहीं, फैक्ट्री का मालिक पहले भी ड्रग्स तस्करी के मामले में जेल की हवा खा चुका है।

Uttarakhand: सीरिया और लेबनान तक थी सप्लाई, जानिए क्यों कहते हैं इसे ‘जिहादी ड्रग’
जांच एजेंसियों के मुताबिक, देहरादून में बनने वाली इस खतरनाक कैप्टागन ड्रग को सीरिया, लेबनान और कई अन्य खाड़ी देशों में सप्लाई किया जाता था। आतंकवाद और युद्ध क्षेत्रों में इस्तेमाल होने के कारण इसे ‘जिहादी ड्रग’ या ‘कैप्टिवेटर ड्रग’ कहा जाता है। इस गोली को खाते ही इंसान का दिमाग पूरी तरह सुन्न हो जाता है और वह भयंकर गुस्से से भर जाता है।
Uttarakhand:नशे का कारोबार

पीरूल प्लांट में लगी भीषण आग,लाखों की मशीनें और कच्चा माल जलकर खाक…


