UTTARAKHAND NEWS:राज्य की पांच विधानसभा सीटें
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद भाजपा ने प्रदेश की राजनीति में कई बड़े रिकॉर्ड बनाए, लेकिन पांच विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां पार्टी अब तक जीत का स्वाद नहीं चख सकी। चकराता, पिरान कलियर, मंगलौर, धारचूला और जसपुर जैसी सीटें हर चुनाव में अलग संदेश देती रही हैं और भाजपा के लिए चुनौती बनी हुई हैं।इन सीटों पर कांग्रेस की पकड़ का सबसे बड़ा कारण मजबूत स्थानीय नेतृत्व रहा है। कई क्षेत्रों में कांग्रेस के नेताओं ने लगातार जनता के बीच रहकर भरोसा कायम किया, जिसका फायदा चुनाव में मिलता रहा। भाजपा को यहां ऐसा स्थायी चेहरा नहीं मिल पाया जो मुकाबला बराबरी का कर सके।
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UTTARAKHAND NEWS:सामाजिक और जातीय समीकरण
सामाजिक और जातीय समीकरण भी इन सीटों पर चुनावी नतीजे तय करते हैं। कहीं जनजातीय वोटर निर्णायक हैं तो कहीं अल्पसंख्यक, दलित और पिछड़ा वर्ग की संख्या असर डालती है। इन वर्गों का झुकाव लंबे समय से कांग्रेस की ओर माना जाता रहा है।इन इलाकों में स्थानीय मुद्दे भी पार्टी लहर से बड़े साबित हुए हैं। सड़क, अस्पताल, रोजगार, पलायन, सिंचाई और किसानों की समस्याएं चुनाव का केंद्र रही हैं। मतदाता यहां अक्सर बड़े नारों से ज्यादा जमीन पर काम देखने के बाद फैसला करते हैं।


