Wednesday, June 3, 2026
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UTTARAKHAND NEWS: हजारों करोड़ खर्च फिर भी कई योजनाएं अधूरी !

UTTARAKHAND NEWS: 14 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को मिला पेयजल कनेक्शन

उत्तराखंड में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर काम किया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में अब तक 14 लाख से अधिक ग्रामीण घरों को पेयजल कनेक्शन दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद कई परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं और करोड़ों रुपये के भुगतान लंबित पड़े हैं।राज्य में जल जीवन मिशन के तहत कुल 14,49,170 ग्रामीण परिवारों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से अब तक 14,14,169 घरों तक नल जल कनेक्शन पहुंच चुका है। पर अक्सर ये खबर सामने आती रहती है कि नल तो बिछ गये पर उन पर पानी की एक बूंद तक नही आती. वहीं कई योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप भी लगा है. लगभग 97 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हो चुका है। हालांकि अभी भी करीब 35 हजार परिवार ऐसे हैं, जहां योजना का लाभ पहुंचना बाकी है।

UTTARAKHAND NEWS: कई चरणों में सैकड़ों पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत

योजना के तहत उत्तराखंड में कई चरणों में सैकड़ों पेयजल परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। इनमें ₹225 करोड़ से अधिक की योजनाएं 293 गांवों के लिए मंजूर की गई थीं, जबकि अतिरिक्त चरणों में ₹56 करोड़ से ज्यादा की अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी मिली। इसके अलावा अलग-अलग जिलों में पाइपलाइन, जलाशय, ट्रीटमेंट प्लांट और वितरण नेटवर्क पर भी भारी खर्च हुआ है।हालांकि जमीनी हकीकत यह भी है कि राज्य में कई योजनाओं का कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाया। रिपोर्टों के अनुसार कुछ समय पहले तक मिशन का करीब 20 प्रतिशत कार्य अधूरा था। साथ ही विभाग पर ₹2000 करोड़ से अधिक भुगतान देनदारी भी बताई गई, जिससे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के सामने वित्तीय संकट खड़ा हुआ।

UTTARAKHAND NEWS: भाजपा विधायक बंशीधर भगत ने उठाया मुद्दा

राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गर्मा चुका है। भाजपा विधायक बंशीधर भगत ने खुद अधूरे कार्यों और जनता की नाराजगी का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि योजनाओं की धीमी प्रगति का नुकसान जनप्रतिनिधियों और सरकार दोनों को उठाना पड़ रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कनेक्शन देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित जलापूर्ति, गुणवत्ता, पाइपलाइन रखरखाव और पहाड़ी क्षेत्रों में स्रोत संरक्षण भी बड़ी चुनौती है।अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार शेष परिवारों तक कब तक पानी पहुंचाती है और अधूरी योजनाओं को समय पर पूरा कर पाती है या नहीं।

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