Monday, March 16, 2026
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17 फरवरी 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा — जानिए समय, देश और राशियों पर प्रभाव

सोमवार, 17 फरवरी 2026 को साल का पहला वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:26 बजे, मध्यकाल 5:40 बजे और समापन शाम 7:57 बजे के आसपास होगा। कुल अवधि करीब 4 घंटे 31–32 मिनट रहेगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और सामान्य दिनचर्या जारी रहेगी।

कहां दिखाई देगा ग्रहण?

यह ग्रहण

दक्षिण अफ्रीका

तंजानिया

जाम्बिया

मॉरिशस

जिम्बाब्वे

अंटार्कटिका

और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में दृश्य होगा।

ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेगा और बाहरी किनारा चमकता रहेगा, जिसे “रिंग ऑफ फायर” कहा जाता है। यह दृश्य करीब 2 मिनट 20 सेकंड तक चरम अवस्था में रहेगा।

ज्योतिषीय स्थिति

ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा। भारत में ग्रहण दृश्य न होने के कारण यहां धार्मिक प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। मंदिरों के कपाट सामान्य रूप से खुले रहेंगे।

राशियों पर संभावित प्रभाव

♈ मेष – करियर और निर्णयों में सावधानी रखें। जल्दबाजी से बचें।

♉ वृषभ – आर्थिक मामलों में सोच-समझकर कदम उठाएं। निवेश टालना बेहतर।

♊ मिथुन – रिश्तों में संवाद जरूरी। विवाद से बचें।

♋ कर्क – स्वास्थ्य पर ध्यान दें, दिनचर्या संतुलित रखें।

♌ सिंह – कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। धैर्य रखें।

♍ कन्या – मानसिक तनाव से बचने के लिए सकारात्मक सोच अपनाएं।

♎ तुला – पारिवारिक मामलों में संयम बरतें।

♏ वृश्चिक – यात्रा या बड़े फैसलों में सतर्कता रखें।

♐ धनु – आर्थिक मामलों में लाभ-हानि का संतुलन बनाए रखें।

♑ मकर – कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं।

♒ कुंभ – यह ग्रहण आपकी राशि में है, इसलिए आत्मचिंतन और धैर्य जरूरी।

♓ मीन – खर्चों पर नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

क्या करें, क्या न करें?

चूंकि ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए किसी विशेष नियम का पालन आवश्यक नहीं है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इच्छानुसार सूर्य या शिव मंत्रों का जाप किया जा सकता है। ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान करना शुभ माना गया है।

कुल मिलाकर, यह एक खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन भारत में न दिखने के कारण यहां इसका धार्मिक प्रभाव नहीं माना जाएगा।

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