उत्तर भारत के प्रसिद्ध ऐतिहासिक मां पूर्णागिरि मेले 2026 का टनकपुर में भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की और मेले को वर्षभर संचालित करने का संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की यह पावन धरती देवभूमि है, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि पूर्णागिरि धाम को स्थायी और सुदृढ़ आधारभूत संरचनाओं से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने मेला क्षेत्र में सड़कों के निर्माण और सुधारीकरण, संपर्क मार्गों के विस्तार, सौंदर्यीकरण कार्यों तथा भव्य प्रवेश द्वार के निर्माण की घोषणाएं कीं। साथ ही आंतरिक क्षेत्र के विकास, विश्राम मार्ग और पुलिया निर्माण जैसे कार्यों को भी प्राथमिकता में शामिल किया गया है। जिला प्रशासन को इन घोषणाओं पर बिना विलंब कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्णागिरि धाम को केवल मौसमी आयोजन तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे 12 महीने सक्रिय आध्यात्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। रोपवे निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिससे यात्रियों की यात्रा और अधिक सुगम होगी। संचार व्यवस्था को मजबूत करने की भी योजना है, ताकि श्रद्धालुओं को निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सके।

चम्पावत जिले को धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से सशक्त बनाने की दिशा में विशेष पर्यटन सर्किट विकसित करने की तैयारी है, जिससे पूर्णागिरि धाम के आसपास स्थित अन्य धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों को जोड़ा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

विकास की इसी कड़ी में टनकपुर बस स्टेशन को इंटर स्टेट बस टर्मिनल के रूप में विकसित किया जा रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित हैं। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कैंपस में आईटी लैब और महिला छात्रावास की स्थापना, साइंस सेंटर का निर्माण, महिला स्पोर्ट्स कॉलेज की प्रगति और जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर ब्लॉक की स्थापना जैसे कार्य जिले को नई दिशा देने वाले कदम माने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह भी कहा कि टनकपुर अब श्रद्धा के साथ-साथ साहसिक पर्यटन का केंद्र बन रहा है। राष्ट्रीय खेलों के दौरान राफ्टिंग को नई पहचान मिली है और श्यामलाताल झील के विकास की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्र को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है।

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने मेला समिति को आश्वस्त किया कि स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और धर्मशालाओं की व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उनका कहना था कि मेले में आने वाला हर श्रद्धालु यहां से सकारात्मक अनुभव लेकर जाए और उत्तराखंड की छवि एक सुसंगठित एवं आतिथ्यपूर्ण राज्य के रूप में और मजबूत हो।
मां पूर्णागिरि मेला 2026 इस बार केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि चम्पावत के समग्र विकास के संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया है।


