देहरादून के गांधी पार्क में बिंदू खत्ता, बापूग्राम, पुछड़ी, बागजाला, गुलरानी टोंगिया समेत इंदिरा ग्राम, गांधी ग्राम और हरि ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग को लेकर इंडिया गठबंधन के घटक दलों ने धरना-प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एक घंटे का मौन उपवास रखकर भूमिहीनों और आपदा पीड़ितों को अधिकार दिए जाने की मांग उठाई।

“लाखों लोगों के सामने छत बचाने का संकट”
हरीश रावत ने कहा कि राज्य में ऐसी परिस्थितियां बन गई हैं, जहां लाखों लोगों के सामने अपनी छत, परिवार और जीवनभर की पूंजी को बचाने का संकट खड़ा है। उनका कहना था कि इसका समाधान राज्य सरकार के पास है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में कांग्रेस सरकारों ने इस दिशा में निर्णय लिए थे, लेकिन वर्तमान में उन फैसलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
वनाधिकार कानून का हवाला
हरीश रावत ने कहा कि टोंगिया गांव, खत्ते और गोठ जैसी बसासतें लंबे समय से अस्तित्व में हैं। संसद द्वारा बनाए गए फॉरेस्ट राइट्स ऍक्ट 2006 के तहत ऐसे गांवों को राजस्व गांव का दर्जा दिया जा सकता है। उधम सिंह नगर, देहरादून और हरिद्वार जिलों में कई ऐसी बस्तियां हैं, जहां वर्षों से लोग रह रहे हैं, लेकिन उन्हें मालिकाना हक नहीं मिला है। आरोप है कि सरकार इन बस्तियों को अतिक्रमण बताकर हटाने की तैयारी में है, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है।

2016 के निर्णय को लागू करने की मांग:-
इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है। इसमें 26 दिसंबर 2016 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के 10 बिंदुओं को लागू करते हुए लाभार्थियों को भूमि धरी अधिकार देने की मांग की गई है। इसके साथ ही टिहरी डैम विस्थापितों और वनों में विस्थापित वन गुज्जरों को आवंटित भूमि का मालिकाना हक दिए जाने की भी मांग उठाई गई। धरने के माध्यम से विपक्ष ने सरकार से इस मुद्दे पर ठोस निर्णय लेने और प्रभावित परिवारों को स्थायी समाधान देने की अपील की है।


