उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम सुशासन और जनसेवा का एक सफल मॉडल बन चुका है। यह अभियान सरकार को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है।

18 फरवरी 2026 तक, प्रदेश के 13 जनपदों—अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी—में कुल 661 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं। इन कैंपों में अब तक 5,20,049 नागरिकों ने भाग लिया और विभिन्न योजनाओं व सेवाओं का लाभ उठाया।
केवल एक दिन में ही 13 नए कैंप आयोजित किए गए, जिनमें 7,282 लोगों ने भाग लिया, जो इस कार्यक्रम के प्रति जनता की बढ़ती उत्सुकता और विश्वास को दर्शाता है।
शिकायत निवारण और लाभकारी योजनाएँ :-
1. इन कैंपों में अब तक 50,066 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 33,240 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।
2. विभिन्न प्रमाण पत्रों के लिए 71,448 आवेदन प्राप्त हुए।
3. अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत 2,89,376 नागरिकों को सीधे लाभ मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जनता को कार्यालयों के चक्कर से मुक्त करना है। शासन स्वयं जनता के द्वार पहुंचे, उनकी समस्याएं सुने और मौके पर समाधान करे—इसी सोच के साथ यह अभियान संचालित किया जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिकायत निस्तारण में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।
यह अभियान आज उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास और जनसेवा के नए मानक स्थापित कर रही है।


