चारधाम यात्रा के मद्देनज़र इस वर्ष यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग पर घोड़ा-खच्चर संचालन के लिए जिला प्रशासन नई एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) तैयार करेगा। इसका उद्देश्य यात्रा रूट पर चलने वाले जानवरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करना है।
शाम 6 बजे के बाद संचालन बंद:-
नई व्यवस्था के तहत शाम छह बजे के बाद यमुनोत्री पैदल मार्ग पर घोड़े-खच्चरों का संचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

डीएम के निर्देश:-
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने जिला पंचायत और पशुपालन विभाग को संयुक्त रूप से एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जल्द ही दोनों विभागों द्वारा यमुनोत्री पैदल मार्ग का निरीक्षण किया जाएगा। डीएम ने विशेष रूप से पशु क्रूरता रोकने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है।
हर साल 3500–4000 का संचालन :-
यमुनोत्री मार्ग पर हर वर्ष 3500 से 4000 घोड़े-खच्चरों का संचालन होता है। पिछले वर्ष करीब 3600 का पंजीकरण किया गया था। अक्सर अधिक मुनाफे के लिए जानवरों से अतिरिक्त कार्य कराया जाता है, जिससे उनकी मौत तक हो जाती है। प्रशासन ने साफ किया है कि इस वर्ष जानवरों पर अतिरिक्त बोझ डालने वालों पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
विशेष व्यवस्थाएं :-
मार्ग में घोड़े-खच्चरों के लिए गर्म पानी और चारे की नियमित व्यवस्था
किसी जानवर की मृत्यु होने पर दफनाने के लिए चिन्हित स्थान
एक बार में अधिकतम 600 घोड़े-खच्चरों को ट्रैक पर अनुमति
इनमें से 100 के जानकीचट्टी लौटने के बाद ही अन्य को आगे जाने की इजाजत
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी एच एस बिष्ट ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर एसओपी तैयार की जा रही है। चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन की यह पहल न केवल यात्रा प्रबंधन बल्कि पशु कल्याण की दिशा में भी एक अहम कदम मानी जा रही है।


