ननूरखेड़ा स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद प्रदेशभर में शिक्षकों में आक्रोश है। उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन की रेसकोर्स स्थित शिक्षक भवन में हुई बैठक में घटना की कड़ी निंदा की गई।
शिक्षकों ने ऐलान किया है कि विरोध स्वरूप आज से प्रदेशभर के प्राथमिक शिक्षक काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। विभिन्न जिलों से देहरादून पहुंचे शिक्षकों ने कहा कि जब प्रदेश के प्रारंभिक शिक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम शिक्षक और कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

आरोपियों पर कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी :-
संगठन की प्रांतीय तदर्थ समिति के सदस्य गोविंद बोरा और दिगम्बर सिंह नेगी ने कहा कि यदि आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
शिक्षा निदेशालय में हुई संयुक्त बैठक में 56 विभागों के कर्मचारी और अधिकारी संगठनों ने भी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना से कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है और यह प्रशासनिक गरिमा के विपरीत है। संगठनों ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट एसओपी जारी की जाए।

मारपीट मामले में चार हिरासत में, हिस्ट्रीशीटर कल्ली की भूमिका की जांच :-
प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल के साथ हुई मारपीट के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वायरल वीडियो के आधार पर चार आरोपियों को हिरासत में लिया है। घटना में कथित रूप से शामिल हिस्ट्रीशीटर कल्ली की भूमिका की भी अलग से जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि शनिवार को उमेश शर्मा काऊ अपने समर्थकों के साथ एक स्कूल का नाम बदलवाने के मामले में निदेशक से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और मारपीट की घटना सामने आई। घटना के बाद शिक्षा निदेशालय परिसर और फिर रायपुर थाने में प्रदर्शन किया गया। पुलिस ने विधायक और उनके समर्थकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं विधायक पक्ष की शिकायत पर भी अलग से मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि दोनों पक्षों की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। वीडियो फुटेज के आधार पर पहचान कर कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। मामले में हिस्ट्रीशीटर कल्ली की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। फिलहाल पूरे प्रकरण ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


