उत्तरकाशी के भटवाड़ी विकासखंड मुख्यालय के ढुमक नामे तोक में तहसील भवन निर्माण कार्य अब विवादों में आ गया है। निर्माण के दौरान किए जा रहे विस्फोटों से आसपास के पांच मकानों और उनकी सुरक्षा दीवारों में दरारें आने की शिकायत सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों के घर वर्ष 2010, 2012 और 2013 की आपदाओं में क्षतिग्रस्त हुए थे, उन्हें शासन-प्रशासन ने पुनर्वास के तहत ढुमक क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई थी। वर्षों की जद्दोजहद के बाद प्रभावितों ने वहां अपने मकान तैयार किए, लेकिन अब सरकारी निर्माण कार्य ही उनके आशियानों के लिए खतरा बनता दिख रहा है।

स्थानीय निवासी अभिषेक रमोला, सुनील नौटियाल, सूरज नौटियाल, जगन्नाथ प्रसाद और अंकित सेमवाल का आरोप है कि तहसील भवन निर्माण के लिए चट्टान तोड़ने हेतु रात में विस्फोट किए जा रहे हैं। इन विस्फोटों से उत्पन्न कंपन के कारण उनके घरों में दरारें आ गई हैं और परिवारों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और ठेकेदार को शिकायत दी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता स्वराज चौहान ने स्पष्ट किया कि ठेकेदार को विस्फोट करने की अनुमति नहीं है और उन्हें चेतावनी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि किसी प्रकार की क्षति होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होगी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब विस्फोट की अनुमति नहीं थी, तो निर्माण स्थल पर विस्फोट कैसे हो रहे थे? क्या निगरानी में चूक हुई या नियमों की अनदेखी की गई?
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार है, जबकि स्थानीय लोग अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।


