उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से बिहार भेजी जा रही रिस्ट्रिक्टेड कोडीन युक्त कफ सिरप की खेप उत्तर प्रदेश के इटावा में पकड़े जाने के बाद राज्य का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अलर्ट हो गया है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने पूरे प्रदेश में मेडिकल स्टोर्स और औषधि निर्माण इकाइयों पर छापेमारी अभियान शुरू कर दिया है।

।खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अनुसार, कोडीन युक्त कफ सिरप का उपयोग चिकित्सकीय उद्देश्यों के साथ-साथ नशे के लिए भी किया जा रहा है, जिससे युवाओं में इसके दुरुपयोग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए दवाओं की गुणवत्ता, लाइसेंस शर्तों और वैधानिक प्रावधानों के अनुपालन की सघन जांच की जा रही है।
आयुक्त सचिन कुर्वे के निर्देश पर ड्रग्स इंस्पेक्टर्स द्वारा एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान औषधि सिरप के निर्माण की प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था और रिकॉर्ड संधारण में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं।

अनियमितताएं सामने आने के बाद संबंधित औषधि कंपनी में कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर तत्काल रोक लगा दी गई है। साथ ही, कंपनी का औषधि निर्माण लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है।
विभाग का कहना है कि अवैध, घटिया और दुरुपयोग की आशंका वाली औषधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अपर आयुक्त, एफडीए ताजबर सिंह ने बताया कि, उत्तराखंड राज्य ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग हब है, लेकिन यहां पर कोडीन युक्त कफ सिरप का निर्माण कुछ ही कंपनियों में होता है। ड्रग्स कंपनियों को कोडीन युक्त कफ सिरप बनाने के लिए कोटा सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स, ग्वालियर की ओर से जारी किया जाता है। ऐसे में मुख्य सचिव स्तर से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स को पत्र भेजकर इस विषय में जानकारी मांगी गई है कि किस-किस कंपनी को कोडीन युक्त कफ सिरप निर्माण का कितना कोटा दिया गया है। जल्द ही इसकी जानकारी मिल जाएगी। उससे पहले ही प्रदेश में जो कोडीन युक्त कफ सिरप बनाने वाली कंपनियां हैं, उन सभी का इंस्पेक्शन शुरू कर दिया गया है।



