हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा प्रकरण में मुख्य आरोपी बताए गए अब्दुल मलिक को फिलहाल राहत नहीं मिली है। नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उनकी जमानत अर्जी पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया है। अब यह मामला नई गठित खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसका गठन मुख्य न्यायाधीश द्वारा किया जाएगा।
इस मामले में पहले से सुनवाई जारी थी। अदालत इससे पूर्व कई सह-अभियुक्तों को जमानत दे चुकी है। इनमें मोकिन सैफी, जियाउर रहमान और रईस अहमद शामिल हैं। हालांकि पुलिस की जांच में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नाम सामने आने के बाद अब्दुल मलिक की जमानत पर अब तक कोई सकारात्मक आदेश नहीं हुआ है।

बचाव पक्ष की दलीलें :-
पिछली सुनवाई के दौरान मलिक की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि घटना वाले दिन उनका मुवक्किल मौके पर मौजूद नहीं था। उनका कहना था कि प्रारंभिक एफआईआर में भी उसका नाम नहीं था और बाद में जांच के दौरान उसे जोड़ा गया। उन्होंने यह भी दलील दी कि जब अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, तो समानता के आधार पर उनके मुवक्किल को भी राहत दी जानी चाहिए।

चार आपराधिक मुकदमे दर्ज :-
जांच एजेंसियों के अनुसार बनभूलपुरा उपद्रव के दौरान अब्दुल मलिक समेत अन्य लोगों के खिलाफ चार अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए। एक मामले में आरोप है कि राजकीय नजूल भूमि पर कथित तौर पर फर्जी शपथपत्र के आधार पर कब्जा कर अवैध निर्माण और प्लॉटिंग की गई। प्रशासन जब अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तो हालात बिगड़ गए और हिंसा भड़क उठी।
8 फरवरी 2024 की घटना:-
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी 2024 को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। देखते ही देखते पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा में पुलिसकर्मी और अन्य लोग घायल हुए, जबकि कुछ लोगों की जान भी गई। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी।
मामले में अब तक 86 से अधिक आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, लेकिन मुख्य आरोपी माने जा रहे अब्दुल मलिक की याचिका अब नई डिवीजन बेंच के समक्ष जाएगी। अदालत के अगले कदम पर सभी पक्षों की नजर टिकी हुई है।


